कहूं पांच कापड़ा पांच वरणू पोशाकां।

दीपै जिण सूं देह सजत सांजत सह साकां।

इण बिन सरै काज आद सूं चलि आई।

कपड़ा लत्तां बिना किसी रह सकै समाई।

पहरण और बिछावणां बांधण ओढ़ण जाणियै।

साफ करण झाड़ण कहो कापड़ पांच पिछाणियै।

पहरण रा पुनि भेद और में पांच बताऊं।

पहिर पांच पोसाग मिनख मिनखापण पाऊं।

पाग अंगरखी कमरबंध धोती बतळाऊं।

पहरण पांवां पगरखी पोसाग गिणाऊं।

इण में उजळ पागड़ी जिण री महमां के कहूं।

सिरैमोड़ पोसाग में पाग बिना सरमां सहूं।

पाघ आघ खिड़कियां बणी बांकी जिण रीतां।

साफो कहो रूमाल पोतियो गावै गीतां।

इण सूं दीपै मिनख पाज पाघां री प्यारी।

भारत री स्यान संस्कृति रही म्हारी।

इण बिन कारण ना सधै भूंडो लागै रूपड़ो।

इण बिन थिर ना थरपवै टीकीजै नहिं भूपड़ो।

इण सूं पुरख पिछाण भेद वरगां रो जाणां।

पाघां रै परवाण देस परदेस पिछाणां।

संसकारां रै समै पवित पूजा री वेळा।

टीकीजै जद भात करै दस्तूर सहेळां।

फेरां में चंवरी धकै नामकरण नागै सिरां।

सुभ अर पूरण ना हूवै तकता जद पाघां फिरां।

घर रो मुखियो धकै नवो जद गेह पत आवै।

पाघ बंध्यां बिन कुण उणां जागां थरपावै।

पाघां थारै पाण रंक राजा बणि ज्यावै।

धरै सीस पर मुकुट हुकम जद पछै चलावै।

जिण री पाघां पग रुळी मिनखापणू वां ना रियो।

मूंछ गई जे पाघड़ी तो हार जमारो सोह गियो।

रजपूतां रख पाघ राज धरम रूपी करग्या।

बामण राखी पाघ गरु पद भारत धरग्या।

बाण्यां राखी पाघ बिणज दुनिमें बिसतार्‌यो

भामास्या घर रूप काज पातळ रो सार्‌यो

पाघ ग्रही चौथै वरण धरम निभायो आपणो।

मरजादां कायम करी भारत भोम घणो।

पाघां बळ द्विजराज धरम भारत रो राख्यो

करम पंथ बतळाय ग्रंथ गीता सो भाख्यो।

रूप विवेकानंद संत पगड़ी सिर माथै।

वेदांतांरी धूम मचाई सगळै साथै।

पाघ दयानंद री फिरी वैदिक धरम उबारणै।

गांधी पेचां पाघरी आंगळ काढ्यां बारणै।

राजावां निज पाघ राखली ऊजळ वरणां।

आजादी में मदत करी राखी मन जरणां।

तज्या राज निज तुरत लाज भारत री राखी।

सूरज चंदरु प्रथी जितै रहसी साखी।

पाघां पाजां आखड़्यां धरम करम अर ग्यान में।

कद भारत कमती रिह्यो ईसर भगती ध्यान में।

पण देखां अब पाघ सरम रहसी किम थांरी।

पोचां पानो पड़्यो चहूं दिस माची घ्यारी।

नेता नामी जीव ऊपन्यो नवो नवेलो।

भ्रस्ट काम नित करै दुखी जनता कर खेलो।

पाघ बंधाई प्रेम सूं सह मिल भारत देसरां।

उण नै नाखी धूड़ में भूरसिंघ मिळ लीडरां।

स्रोत
  • पोथी : जलम भोम ,
  • सिरजक : भूरसिंह राठौड़ ,
  • संपादक : मूळचंद 'प्राणेश' ,
  • प्रकाशक : राजस्थानी भाषा प्रचार प्रकाशन, बीकानेर (राज.) ,
  • संस्करण : 2-3, जून-दिसम्बर
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