पड़ी पड़ी

घड़ी-घड़ी

घड़ी करै टिक-टिक

पण

कुण टिकै!

टिकै बै है

जका

घड़ी-घड़ी बिकै

अर

बिकै बै’ई है

जका

घड़ी-घड़ी झिंकै।

इण खातर

म्हनै लखावै

घड़ी टिक–टिक नीं

झिक-झिक करै।

बतावणौ

घड़ी रो फरज़ है

अब

बो’ई सुणौ

बो’ई अंगेजौ

जकै नै गरज है।

घड़ी तो

घड़ी-घड़ी

सीख देवै

हाथ पकड़-पकड़

मारग बतावै

घड़ी नै

इस्सी कांई गरज पड़ी है।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : ओम पुरोहित कागद ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राज.) ,
  • संस्करण : 15
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