बरसै है पाणी

कठै रिजर्व

कठै जनरल

कोटै ज्यूं

कठै मानखो गळो गीलो करण नैं तरसै

कठै बाढ़ सूं मरै लोग

कठै फसलां पाणी नैं तरसै

कठै जळ-समाधि लेवै जमीं

चलण है अबार

फगत फरक इत्तो के

कुदरत कदै रिस्वत लेवै कोनी।

स्रोत
  • पोथी : मंडाण ,
  • सिरजक : सुनील गज्जाणी ,
  • संपादक : नीरज दइया ,
  • प्रकाशक : राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी ,
  • संस्करण : Prtham
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