दिवंगत, सुरगवासी आत्मा!

आज दिनूगै भोर में

सुण्यो कै अब तूं है नहीं

अखबार री मोटी-लकीरां बीच

बांच्यो, अब नहीं तूं

फेर चौरावै सुण्यो

तूं अब नहीं रैयो!

और बातां भी सुणीजी

गैलड़ा छापा संभाळ्या

च्यार दिन पैली चाली ही बात थारी

अर छप्या चितराम भी हा, धुंधळका-सा

और नेपाळी-निराला रै पछै

जिण भांत उणनै गुण्या

आज म्हे उण थारलै

व्यक्तित्व अर क्रितित्व सूं

कर ओळखाण सगळी

किरतबां नै पूरणै खातर

सांच कैवां हां कै

च्यार कवि सम्मेलन

अर छव गोस्ठ्यां मांय

छोटा-बडा प्रस्ताव पास कर्‌या है

थारै मान मांय माथा निंवाय दीन्या है

पण सुरगवासी आत्मा! खम्मा करोला

हरेक सम्मेलन पछै

कविता री कीमत पर

साहित्य रै सौदै पर

समझौतो को होय सक्यो नीं

अर हर-कुणसो-ई आपनै

रोक नीं पायो

गोस्ठ्यां रा स्वल्पाहार मांय

म्हारला माथा मांयली

थारै कानली सरधा रा भाव

मुगट होयग्या

कोरी,

‘टी-सेट’ री खणखणाट

अर आपसरी री

आलोचना-प्रत्यालोचना

बाकी रैयगी

संज्ञाहीण मुक्तिबोध!

म्हारली असींव सरधा रो मोल

नीं कर सक्या क?

ओजूं अेक विचार है फेर

थारै सम्मान मांय

थारै सारू

थारै नांव पर

अेक निसा-मनावण रो

वाह-वाही लूटण रो

सुवारथ नै परमारथ

सिद्ध करण रो अर

इण पुन्न रा काम सारू

आपरी आसीस री दरकार है!

स्रोत
  • पोथी : ओळमों ,
  • सिरजक : प्रमोद बेदी ,
  • संपादक : किशोर कल्पनाकांत ,
  • प्रकाशक : कल्पना लोक प्रकाशन रतनगढ़ (राज.) ,
  • संस्करण : नवम्बर
जुड़्योड़ा विसै