मा..!

तूं क्यांरी घड़्योड़ी है?

तूं थकै क्यूं कोनी मा?

मा! तूं घर मांय सैं सूं पैली उठै

सूरज थारै सूं पछै उठै,

आखै घर रो काम निवेड़'र

चा’ बणाय'र जगावै तूं सगळां नै।

मा..!

म्हैं तनै आखै दिन

भूंवाळी खांवतां ईज देखूं

मा, तूं क्यांरी घड़्योड़ी है?

तूं थकै क्यूं कोनी मा?

मा..!

घर थारै माथै घूमतो

लट्टू-सो लागै म्हानै

अर

तूं इण घर री धूरी है मा।

मा..!

घर थारै सूं ईज आबाद है

थारै बिन्यां पांवडो नीं चाल सकै

मा! तूं क्यांरी घड़्योड़ी है?

तूं थकै क्यूं कोनी मा?

मा..!

तूं खेत मांय आखै दिन बरोबर भाजै

भळै आथणपोर आंवतां

सगळो काम, किंयां कर लेवै मा?

मा! तूं क्यांरी घड़्योड़ी है?

तूं थकै क्यूं कोनी मा?

मा..!

सुरज थारै साथै

भाजतो-भाजतो थक ज्यावै

थारै सूं ईज इत्तो बळै, मा..!

मा! म्हैं तनै कदैई सोंवती नीं देखी

कांईं तूं जागती रैवै? मा..!

मा! तूं क्यांरी घड़्योड़ी है?

तूं थकै क्यूं कोनी मा?

मा..!

म्हारै इण सवाल रो उथळो दे

सवाल म्हानै हरमेस सालै है, मा..!

साची-साची बात बता मा

तूं क्यांरी घड़्योड़ी है?

तूं थकै क्यूं कोनी मा?

स्रोत
  • पोथी : कवि रै हाथां चुणियोड़ी
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