देख्यौ छै
थाने परबत कदी
रोतो हुयो,
न रोवै परबत,
ऊ तो रोवाण छ
औरां क ताईं,
ईं सार ई
बण ग्यौ ऊ ठूंठ,
रह छ सारा पहर ही
अणमणो, चढ़चढ़ौ
ऊँको काळजौ
होग्यो छाठो, भाटा सूं भी ज्यादा
बच्यारी बरफ
माथो फोड़-फोड़
हारगी ऊ सूं
जब खीज को पाणी
ऊं का माथा प सूं
कट जावगो,
आकास सूं गरक
मरबा को करगो ऊँ कोसिस,
सुणी थांनै
अब तो
मिनख भी
बणग्यो परवत।