मिनख री जात नै समझावणो दोरो घणो।
इण अमुझी पीड़ नै पी जावणो दोरो घणो।
जो पराई पीड़ में पड़ जावता
बै आदमी रिया कठै।
सिर झुकावण जोग पग,
बै आदमी रिया कठै।
जिन्दगानी जी रिया हां, पण जीवणों दोरो घणो।
जहर भी म्हे पी रिया हां पण पीवणो दोरो घणो।
पेट री जे भूख होवे तो,
सहज में मिट सकै।
पण कठैई अन्त कोनी,
मनरी सुरसा भूख रो।
मानखै री भूख नै, अब मेटणो दोरो घणो।
और जाती लाज नै, अब रोकणो दोरो घणो।
झूठ पर सौ झूठ बोलै,
झूठलो ओ मानखो।
जानवर सूं भी गयो बित्यो,
हुयो ओ मानखो।
इण जमाना में जमारो मिनख, काटणो दोरो घणो।
हेज सगळां में बराबर बांटणो दोरो घणो।
देवता खुद तरसता हा,
मानखै री जूण नै।
रामजी लूंठी करी इण,
मानखै री जूण नै।
उण मानखै रो मान अब रैवणो दोरो घणो।
मानखै नै मानखो अब कैवणो दोरो घणो।
बात पर मर जावता,
बै आदमी रिया कठै।
सिर कट्या पाछै भी लड़ता,
बै आदमी रिया कठै।
आणरी इण बात नै समझावणो दोरो घणो।
देश रा सम्मान नै अब राखणो दोरो घणो।