छांटी छुळकी बाजरी लेय,

नानो पीस'र चून।

गदरी गदरी पोयी रोटी,

बणीअफलातून।

ग्वारफळी रे साग साथै किसी'क आछी लागै!

बाजरी री रोटी म्हानैं किसी'क मीठी लागै!

कपलो मूळी रो ले लेयर,

रोटी साथै खाय।

मीठी रोटी मीठी मूळी,

मन तिरपत हो ज्याय।

मूळी साथै रोटी म्हानै, किसी'क चोखी लागै!

बाजरी री रोटी म्हानै, किसी'क मीठी लागै!

ऊनी ऊनी रोटी लेय'र,

घी सक्कर स्यूं खाय।

दूजै भोजन री ईंछा भी,

आवै नीं मन मांय।

देवता रो भोजन फीको, अैं भोजन रे आगै।

बाजरी री रोटी म्हानै किसी'क मीठी लागै!

ऊनी मोटी रोटी खावै,

दूध दही में चूर।

नहीं मिनख रो मन पछतावै,

मेवां नै भी झूर।

परै बठावै मेवां नै भी, किसी'क आछी लागै।

बाजरी री रोटी म्हानै किसी'क मीठी लागै!

स्रोत
  • पोथी : अेक बीसी ,
  • सिरजक : भौमराज भंवीरू ‘मंगल’ ,
  • प्रकाशक : साहित्य मन्दिर राजगढ़ (बीकानेर)
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