म्हैं पेरिस में मरूंला

घणघोर बिरखा रै बिचाळै

वौ दिन म्हारी याद में

अबार सूं इज तै हुयगौ है

म्हैं पेरिस में मरूंला

इण बात नै

कीकर नकारी जा सकै।

गुरुवार नै

क्यूं के आज गुरुवार नै

म्हारी कवितावां इत्ती गद्यात्मक हुयगी है

अर म्हारा हाडकां में इत्तो दरद हुय रयौ है

जैड़ौ पैली कदैई नीं हुयौ

नीं म्हैं पैली कदैई

इत्तौ आघौ घूमण नै गयौ

नीं पाछौ आय’र आज सूं पैली

म्हैं खुद नै

इत्तौ अेकलौ मैसूस्यौ।

सेजार वेलेजो मरगौ है

सगळा जणा मारौ उणनै

अर वौ पडुत्तर में

कीं नीं कैवैला

वौ इज जाणै है

के उणनै कित्तौ सताइज्यौ गयौ है।

दूखता हाडका

अर गुरुवार साखी है।

अेकलपणौ

बिरखा

अर अै लांबी सड़कां

इण बात री प्रमण।

स्रोत
  • पोथी : अपरंच अक्टूबर-दिंसबर 2015 ,
  • सिरजक : सेजार वेलेजो ,
  • संपादक : पारस अरोड़ा ,
  • प्रकाशक : अपरंच प्रकासण
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