पगथळियां री लाली सूं ऊषा मुळकाई
सागी सुन्दरता सज-धज सुरगां सूं आई
बीजळ में पळकै जिण रै तन री परछाई
रुतु-वसंत जिण गौरी रै तन री अंगड़ाई।
पग पोयण, पींडी ‘अेरावत’ सूंड पकड़ियौ
कटि पतळी री लचक देख सिंह लाजौ मरियौ
उदर-सरोवर बीच भंवर सूंटी सिर जायौ
कुच उभार ज्यौं हिवड़ियै रो हेत उमड़ियौ।
नस री सौभा संख, होठ रेशम रतनारौ
दांत दाड़मी बीज कमल जेड़ौ उणियारौ
मुळकण थिरकण देवां रा हिवड़ा हरसावै
सुन्दरता साकार मदन बण बांण चलावै।
नाक सूंवटियौ, नैण-मिरगलो, भौंह-कबाणी
हेम-हींड नथड़ी, चड़ झूलै लालौ-राणी
गळ बांकी-अल्कां मिस मोर्या नाच दिखावै
सुन्दर मुख री ओप मास सांवण सिरजावै।
मोती भरिया मांग, घटा में बीजळ पळकै
चोट्यां गूंथोड़ी ज्यौं काळी नागण लटकै
रूड़ौ रमणी रूप, सुरग रा देव डिगावै
रंग-राग-बांणी जिण रा चित रांम रचावै।
हेम कांवड़ी, चीर चांद री कळी कचनारी
का बिजळ री रेख सरस कड़ियां कविता री
तपधारी सी साध सिद्धि सुन्दर मतवाळी
मदन-रती देवेन्द्र-शची पोयण मुख वाळी।
बीणा री झिणकार-हुळस मीठी, हिवड़ै री
का दिवलै री जौत, आस क्वांरी जिवड़ै री
का सिरधा साकार, सुरत अन्तर ध्यांनी री
का ज्यौं लगन अटूट खड़ी आतम ग्यांनी री।
अंतस रो अनुराग ओळ आच्छै लिलाड़ री
सिरजण री सौगात, कवि सुरतरु डाळ री
सरगम री सम-ताळ, तूलिका चित्रकार री
रूपाळी नै मिनख थमी, तलवार काळ री
किण आले कारीगर थारी मूर्ति रचाई
नेह-नदी सुरगंगा हिवड़ै मांय समाई
चांदै मिस पळकै थारै नख री परछाई
रच ‘मूमल’ ब्रह्मा खुद प्रगटाई चतुराई।