हीरालाल मिल्या जीरालाल सूं
कैवण लाग्या छानै सी—
अजी यो मोतीलाल घणो मूरख है।
जोग बण्यो मण्डी रै माहीं
हीरा सूं भेंट्या मोतीलाल
चुपकै सैं बोल्या कान में—
कांईं कहणूं कांईं सुणणो
घणो मूरख है जीरालाल।
मोतीजी मिलग्या हाट्यां में
जीरालाल ऊभा सामैं
बातां-बातां में कह बैठ्या—
कितरो मूरख है हीरालाल।
मोकै सूं इक दिन तीनूं ही
भेळा होग्या चोराया में
साथ्यां में हेत घणो, ब्योहार माण रिया हा
मूंडा पर मीठा, बातां घणी छाण रिया हा
दुख दरद री बातां, बखाण रिया हा
कपट री टाटी सूं, आमां-सामां पिछाण रिया हा
पूठ पाछै किस्या, मूंडा आगै इस्या
तीनां में अेक ही गुण छै
राम जाणै असली मूरख कुण छै
इस्या दोगला, बहरूपिया रा भेस में
अेक ही नी, मोकळा मिल जासी म्हारा देस में।