मुरग्यां नी हां

भेडां हां म्हे

म्हारी कोई खाल उधेड़ै

नसड़ी बाढ़ै

ऊन उतारै

सीयां मारै

म्हे बोलां नीं

सोनै रा इंडा सेवां म्हे

पण मुरग्या नीं भेडां हां म्हे

म्हारै ईं तन-मन री गिरमी

ऊनी गाभां मांय समेट्यां

पैर्‌यां-ओढ्यां बेंत लियां थे

खड़्या दड़ूको

म्हारी ईं गिणती री ताकत

गेड थमावै थारै हाथां

ग्वाळा बण थे गिरवी नाखो म्हानै!

म्हारै घर नै!!

अर

धरती रै तन-मन धन नै

जिण माथै म्हे करां जुगाळी

पण कद तांई!

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : मदन सैनी ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राज.) ,
  • संस्करण : 15
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