मुळकती चांनणी रा आकळ मोह ज्यूं

पिळू-पिळू अन्तर भरी रूप-तळाई माथै-

तिरै थारी प्रीत रौ सतरंग लैरियो

जिण में झीणौ-झीणौ झांकै है-

काजळिया नैणां रौ सम्मोहण-जाळ

नागण वेणी री लय लहरणी मे।

सुरां’ळी रंग रळी रौ रळाव

सुतर-सरोवर डोब डोहण नै

हींजरतै हियै रौ बारण बंध आफळै।

स्रोत
  • पोथी : जागती-जोत ,
  • सिरजक : नारायण सिंह भाटी ,
  • संपादक : कन्हैयालाल शर्मा ,
  • प्रकाशक : राजस्थानी भाषा साहित्य एवं संस्कृति अकादेमी, बीकानेर (राज.) ,
  • संस्करण : मई, अंक - 03
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