उण दिन

काल्याण में कांठळ मंडियोड़ी ही

बधाई देवण आया हा

बधाऊड़ा सुगन चिड़ी रै साथ

अर मामोळियां मंगळ गीत गायो हो

उण दिन

हां उणी दिन— आभै इमरत बरसायो हो

उण दिन

रेत रो कण-कण मुळक्यो हो

जिण दिन

पैली बार रिनरोही मांय

थारै नाम रै साथे

म्हैं म्हारो नाम मांड्यो हो।

स्रोत
  • सिरजक : रेवंत दान बारहठ ,
  • प्रकाशक : कवि रै हाथां चुणियोड़ी
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