रमै थूं निरभै थारै मांय

करै कोरी बंतळ

इण जूण री अंवेर,

अेकर नांख निजर बारै

सोध ले खुद नै

कठै गुमगी थारी पिछाण?

मंडिया रैयग्या दोय आखर

थारै नांव रा

कोरै कागदां माथै,

इण अखूट अंधारा मांय

अमूंझैला कद तांई

ओळख रै खातर

जुगां-जुगां री मून धार’र?

थूं रमै अठै

अर भटका खावतौ भमै

बरजे है खुद नैं थूं

भरमावै है जूण

बंतळ रै इण कूंडाळियै सूं

अेकर बारै आव

सोध ले थारी पिछाण

गुमगी है जिका

थारी अमूंझ रै अंधारा मांय

थनै भरमावै सगळा

अर अंवेरै थूं

मांयले अखूट अंधारा नै,

अेकर फेरूं चेतावूं

करूं सावचेत

आव, बारै आव

खुद री सींवां नै डाक’र

थारी पिछाण रै खातर।

स्रोत
  • पोथी : जागती जोत ,
  • सिरजक : सत्यदेव संवितेन्द्र ,
  • संपादक : डॉ. भगवतीलाल व्यास ,
  • प्रकाशक : राजस्थान साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, बीकानेर
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