जे थे ए.सी. रै आगै बैठ’र

घंटा अेक पोथी बांचो, तो

गांव में कुहाइजै-

छोरै री है चोखी भणाई।

म्हे चिमनी रै च्यानणै

आखी रात भणां

गांव रा मिनख कैवै—

काम सूं डरतो बैठ्यो है।

थांरी फदू बातां नै

सईकां तांई भणाईजै।

म्हारी बात थांनै

कार्ल माक्स अर अंबेडकर सूं

करड़ी लागै।

म्हे तंगी मांयनै भणाई कर’र

जे बण जावां पटवारी।

थारै मूंडे सूं निकळै—

तो है कोटै रो पटवारी।

स्रोत
  • पोथी : राजस्थली लोकचेतना री राजस्थानी तिमाही ,
  • सिरजक : सतीश सम्यक ,
  • संपादक : श्याम महर्षि ,
  • प्रकाशक : मरुभूमि शोध संस्थान
जुड़्योड़ा विसै