ऊमर री झोळी में तो बस भाया! गिणती रा दिन च्यार!

च्यार दिनां सारू चिणवावै, म्हैल माळिया अैड़ा लोग।

अमरपट्टो अठै लिखावण, लड़-लड़ मरै कुपेड़ी लोग।

जाण बावळो जगत’र जीवण, आळा भोळा भाव-विचार।

ऊमर री झोळी में तो बस, भाया! गिणती रा दिन च्यार।

च्यार-दिनां सारू रच नाखै, झूठ-दंभ छळागारा लोग।

पांखडां रै पाण बणै है, कितरा प्यारा खारा लोग।

भरमां में भूल्यां भरमावै, निज नै, दूजां नै इकसार।

ऊमर री झोळी में तो बस, भाया! गिणती रा दिन च्यार।

च्यार दिनां सारू आपसरी, मांड्या ऊभा पाणा लोग।

गंडकां ज्यूं अबखा गुर्रावै, बणग्या है कटखाणा लोग।

मिनखजमारो इयां होंवतो जावै जग में बंटाधार।

ऊमर री झोळी में तो बस, भाया! गिणती रा दिन च्यार।

च्यार दिनां सारू जीवण में अंधकार नै खांचै लोग।

गाभा पैर्‌योड़ा अै सागी, चोड़ै बागां नाचै लोग।

इस्या निसरड़ा लोगां नै है, किस्यै ग्यान री के दरकार।

ऊमर री झोळी में तो बस, भाया! गिणती रा दिन च्यार।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : किशोर कल्पनाकांत ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राज.) ,
  • संस्करण : 14
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