तरुण-अरूण कवि!

आप निरासा री धुन्ध सूं बारणै निकळौ

आपनै उ‌द्घाटित करणो है—

जीवण रो सौन्दर्य।

युग प्रहरी कवि!

आप जन-जन रै मायनै जग्यां

मन रा दीन हीण भावां नै भस्म करो

आपनै तैयार करणी है

नुंवी आस्था री उपजाऊ भौम।

भविस्य दृष्टा कवि!

आप भावी सूरज बण’र

संस्कृति री फसल रो पोखण करो,

आपनै चेतना री जड़ां नै गैराई तक जमावणी है

सोसण सूं मुगत आपरी रचना

मंगल कामना रो सुवर्ण तोरण द्वार बणावैला

आपरी कीरत नै

आबा वाळी पीढ़ियां गावैला।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : रमेश मयंक ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-29
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