कान्हा थारी मुरली सूं थाकी परी
लागी कठी नै व्हाला लागी कठी
जमना रै कांठै, कदम्ब रै हेठै
म्हांनै छेड़ै घणी नै रुवाणै घणी
कानन में बाजै नै आनन लाजै
हियो निस री जायै अंग खेंचायै
म्हांणै हिवड़ै बसी नै जिवड़ै लसी
बलोणा करतां कै जीमण जीमतां
लूरां लेवता कै पी संग रैवतां
म्हां तो कूज सूणी नै बावळी बणी
नी बाजै तो म्हांनै कळ नी आवै
आ बाजै तो म्हांनै कळ नी आवै
म्हां तो दुविधा पड़ी नै थकीत खड़ी
ओ नंदलाला, ओ रे बंसी वाळा
ओ छैल छबीला नै ओ मतवाळा
म्हां तो चरण पड़ी नै उबारो धणी।