गोरगड़ी रे भई गोरगड़ी, सासू छोटी बहू बड़ी।
बूढी बळद डोकरी पोढी, खाट पड़ी बरड़ावै रे,
आछो नुवो जमारो आयो, देख्यो-सुण्यो न जावै रे,
फेरा खातां ही छोर्याँ तो ठुकराणी बण जावै रे।
सासू बैठी काम करै छै भवां खा रही पड़ी-पड़ी॥
जाय घूमबा भर्या बजारां, लाज सरम नीं पालै रे,
चारूं कूंटां देख नैणा नै भटकाती-सी चालै रे,
जोबनिया रो जादू डाळै चोखा मिनखां माळै रे।
होटल और सलीमो देखै, टिकै न घर में एक घड़ी॥
चपड़-चपड़ इंगरेजी बोलै, कदै न कोई सारै रे,
चाट खांवती दूना चाटै, जीभ चबड़क्या मारै रे,
जेठ-जिठाणी कहता हारै, बहू कदै नीं हारै रे।
गांव-गवाड़ी घोळ पी गई, आ कागद री फूलझड़ी॥
इबकै तो भगवान पढ्योड़ी छोर्यां पर किरपा कीजै,
खै तो वा नै मत परणाजै खै टाबरिया मत दीजै,
रूळती हुई लुगायां की भी कदै-कदै तो सुध लीजै।
नीतर टूट-बिखर जावैली मोत्यां री अनमोल लड़ी॥