गुडकी री मां बोली—

“सुणौ हो कांई गुडकी रा बापू,

जोसी जी कैवै हा

कै थारी सैंग मनोकामनावां

पूरण होवैगी।”

मैं बोल्यौ—

“आ बात तो ठीक है,

पण गुडकी माऊ-माऊ कर’र

भौत रोवैगी।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : सत्यनारायण सोनी ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-14
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