नवा सबद

आडा-टेडा भाव

काचा-पाका अरथ

नवी कलम सूं

मांडू

नवै कागद

नवी कविता सारूं

पण कठै सूं लावूं

नवी पीड़, नवी प्रीत, नवी जूण

नवी जूझ अर नवी झाळ

बदळग्या हथियार स्यात

तरीको नवो होयग्यो।

पण वठै री वठै है

पीढियां जूनी पीड़

बरसां-बरस चालता जुध

जुगां जूनी कळपती झाळ

अर रोटी, कपड़ां, मकान सारूं

मिनखाजूण री सागण जूझ..!

स्रोत
  • पोथी : मंडाण ,
  • सिरजक : गौतम अरोड़ा ,
  • संपादक : नीरज दइया ,
  • प्रकाशक : राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी ,
  • संस्करण : Prtham
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