थांरी प्रीत!
म्हारै ऊजड़तै संसार रै
थाग लगायनै
बचावतौ राख्यौI
म्हारै टूटतै मन नै
हेत सूंप
जीवतौ राख्यौI
म्हनै म्हैं हुवणौ
सिखायनै,
फेरूं ऊभौ कर्यौI
थारी प्रीत ई तो है…
जिकी रै पांण
आज म्हैं मांडूं
जीवण-जुद्ध री ओळियां!