दो दिन तो जीवण जीबा दो

सौ दिन तो दुखड़ा छै सहणा

उमर ऊधारी जांचेड़ी

खुसियां बेबस सी खांचेड़ी

कोई उजर नहीं सुणणां कद ही

तुर जाणा हुकम हुवै तद ही

प्याला कर झाळा पीबा दो

रंग हाळा अधक नहीं रहणा

तिसणा रो ओड़ नहीं तो भी

लालच रै लागो मन लोभी

तूं छांट-छांट ताणी तरसै

बैभव मद आमर सूं बरसै

सुर चातक गळ रा सीबा दो

गुण स्वात बूंद रा जद गहणा

ज्यों सुपन सुनैरा पलकां रा

उळझ्या कानन मन अलकां रा

खिण दो खिण न्हाळ सकां देखां

खिंच जाणी भोर किरण रेखां

मत सपणां नै मिट जाबा दो

कांईं इण सपणा रा कहणा?

सजणा! मत ग्यान सुधा सींचो

म्हारी भूलां पर दृग मींचो

रंग-रौळ धरा माथै रस री

बस राखूं जीव नहीं बस री

दो बूंद गरळ घट करबा दो

बस फेर सुधा रा नद बहणा।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : बद्रीदान गाडण ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राज.) ,
  • संस्करण : 11
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