समझौतां रो सिलालेख वहै

इस्यो जीवणों कांई जीवणों?

बेच-बेच'र स्वाभिमान नै

सुविधावां री सेज खरीदां

इसी आपणी चाव नई है

कांटा रो मारग म्हाणो है

जिणरी कांई मांग नई है।

बदकारां नै नमण जठै व्है

इस्यो जीवणों कांई जीवणों?

खोस-खोस'र हक दूजां रो

म्हाणो कोई म्हैल बणावां

इसी आपणी राह नईं है

हकदारां री करां वकालत

जिणरी कांई फीस नईं है।

साजिस में सामिल व्है जीवां

इस्यो जीवणों कांई जीवणों?

कंगूरा वणवा रा खातर

पतन खड्ड में गिरता जावां

इस्यो आपणो सपन नईं है

जन मानस नै उच्च बणावां

इण सूं बढ़'र जतन नईं है।

पग-पग माथै झुकता जीवां

इस्यो जीवणों कांई जीवणों?

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : भागीरथ मेघवाल ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राज.) ,
  • संस्करण : 11
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