खाविन्दजी अर खोदै रै

धार-धार पोवणी मिटी!

बींदणीं, बरजी कै राजी हुई

कुण जाणै?

पण! ठीक हुई कळै

ठीक ही हुयो घर कठै हुई

बाप बेटो दांतै हुया

परणाया पूत जोड़ायत आगै

शेर हुया!

अेक धक्क

अर दो टुक्कड़

फोगट रा टुकड़ तोड़णा

देण मिटी!

कुण लेवै

बूढ़ियां रा सदका

अर रंडवापण में बांरा

घरां बैठा माचै री

दावण ढीली करणी

कुण खींचै

आये दिन दावण

मरै तो माचो छूटै

माळियै रो

अेक कमरो तो खाली व्है

सासूजी तो रामसरण व्ही

जिद छूटी

खोदो सुसरो

मरै मांचो छोडै

मिजळो बण’र

बडका बोल बेटै रा

आये दिन सुण’र

बोबाड़ा भळै करै

पण बूढ़ा हाडका

अर बोदी बाड़

किताक दिन चालसी

सेवट तो झुरैला हीज

पण दिन कद आसी?

इणी टीस-टीस में

कळजुग रा जाया पूत

बूढ़ा माईतां नै

समझै है बोझ!

जणां तो

कैवत चालगी है’क

अेक बाप

च्यार बेटां नै पाळ सकै है

पण

च्यार बेटा अेक बाप नै नहीं।

केड़ौ टेम आयग्यो

बीसवीं सदी में

परिवारां रा अै हाल

तो आवणहाळी सदी में

कांई व्हैला

हे राम!

आभो क्यूं नीं फाट पड़ै

सीता खातर तो धरती फाटी

पण दशरथ रो कांई हाल हुवैला

कुण जाणै?

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : स्वामी खुशालनाथ’धीर’ ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-33
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