थे जो चावो हो

उण पर म्हूं बी सोचूं हूं

पण

कंई इतरो आसान है

फूल नै गंध सूं अलग कर देवणो।

यो जो अैहसास

बरखा होवण पर

उग आवता बिरवा नांई

आपणै बीच जलम्यो

पळ्यो, मोटो व्हियो अर

जबरो रूंख वण गियो

कंई इतरो आसान है

मानसिक अलगाव रा

कुल्हाड़ा सूं उण नै

काट’र धरती पर पटक देवणो।

स्यात कोई कर सकै

स्यात थे बी कर सको

क्यूं कि उण रो अर थांरो

खेत, बरखा, बिरवा

अर फूलां सूं

कोई सबंध रह्यो कोनी।

म्हे तो उगाया है इणा नै

आपणै भीतर

अर पायो है

नेह रो नीर

दोरो है म्हारै लियै

फूल नै गंध सूं

अलग कर देवणो।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : भागीरथ मेघवाल ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-15
जुड़्योड़ा विसै