आई होळी आई होळी

रंगा री ल्याई रंगोळी।

टाबरियां री फिरै टोळी

मिल’र सारा खेलै होळी

आई रे आई होळी

रंगा री ल्याई रंगोळी।

भांत-भांत रा ल्यागै रंग

होळी खेलै सारा संग

रंग ज्यावै है अंग-अंग

बाजै है ढोलक अर चंग।

भांत-भांत रा पकै पकवान

खुशियां री तो खुलज्यै दुकान

सगळा रै मन भावण वाळी

आई भाई, आई होळी

रंगा री ल्याई रंगोळी।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : पृथ्वीराज चौहान ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-29
जुड़्योड़ा विसै