हंस वाहिणी! तार छेड़ दे वीणा रा।
पंचम सुर में गावण लागै
बोल खोल मत हीणां रा।
कंवळा फूल खिलै भावां रा,
अै पोयण थारै चरणां रा॥
हंस वाहिणी! तार छेड़ दे वीणा रा।
वाक भवानी सुरसत माता,
हिवड़ै में इमरत भर दे।
किरपा तार होळै सै छेड़ो,
सूखा में सावण करदे॥
हेस वाहिणी! तार छेड़ दै वीणा रा।
मन रे मान सरोवर में,
थारै हंसा नै विचरण दे।
वीणा हाथ लियां माता थूं,
हिय पोयण पर आसण दे॥
हंस वाहिणी! तार छेड़ दे वीणा रा।
रतन भंडार अखूटो थारो,
मधुर वीणा झणकारो दे।
खोल दे इमरत कळश नै,
किरपा कोर रूणकारो दे॥
हंस वाहिणी! तार छेड़ दे वीणा रा।