म्हैं सुणी है

थूं चूंच दी है

चुग्गो थूं देसी

पण बगत माथै

बगत पण बो

आसी कद

तो बता परमेसर!

भी सुणीं है

थूं जद देवै

छप्पर फाड़’र देवै

थूं परमेसर है

छप्पर बांध

फाड़ै क्यूं परमेसर?

देवणों

जे थांरै है हाथ

तो दाता

बगत टाळ’र

अनै छप्पर फाड़’र

मत ना दीजै

भोत दोरा बंधै

म्हारै झूंपड़ा!

स्रोत
  • पोथी : भोत अंधारो है ,
  • सिरजक : ओम पुरोहित ‘कागद’ ,
  • प्रकाशक : बोधि प्रकाशन, जयपुर ,
  • संस्करण : प्रथम
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