पूजणजोग

पण

भूखी-तिरसी

रड़बड़ती।

बढ़तै अतिक्रमण में

गऊचर नै

नाळती फिरती

एक

थाकोड़ी गाय।

स्रोत
  • पोथी : जागती जोत जनवरी 1996 ,
  • सिरजक : राणुसिंह राजपुरोहित ,
  • संपादक : गोरधनसिंह शेखावत ,
  • प्रकाशक : राजस्थानी भाषा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, बीकानेर
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