किरकेट का शौकीन है मौसम और किसान।
पिच है बाळू रेत की सारो राजस्थान॥
मैच फिक्स कर खेलर्या मौसम और अकाल।
जीत, हार, रन, विकेट पर पूछै कूण सवाल॥
मौसम अंपायर बण्यो, बैटिंग करै अकाल।
जे किसान ल्यै विकेट तो झट कै’दे नो-बॉल॥
मौसम अय्यां थ्रो करै लेकर कै संधान।
रन आउट हर बार ही होतो रह्यो किसान॥
अब कै फागण यूं मिल्या किरकिट और अकाल।
झटको मारै अेक तो दूजो करै हलाल॥
फागण और किरकेट की इज्जत को कर ख्याल।
खुद ही थप्पड़ मार कर गाल कर लिया लाल॥
खेतां की पिच पर मच्यो मौसम को हड़कंप।
जीरो पर आउट कृषक उखड़ गया स्टंप॥
मौसम को छक्को लाग्यो बॉल पवेलियन पार।
बिना बात ही उछळतो रह्यो कृषक हर बार॥
खेती अर किरकेट में या ही जूनी रीत।
जैंकी पिच गीली हुई समझो ऊंकी जीत॥
खाद, बुवाई, बीज की मौसम ले ली भेंट।
पाछै भी भूखो रह्यो कितणो मोटो पेट॥
मौसम तगड़ी टीम है और कृषक नाचीज़।
वन डे, प्रेक्टिस मैच कै, हार गयो सीरीज॥
कय्यां जीतैगो कृषक मौसम संग किरकेट।
छै रन ओवर अेक में, ओवर थ्रो की भेंट॥
जो भी चावै छेड़ ले मौसम हो या अकाल।
हीणै की जोरू जिसो हुयो कृषक को हाल॥
मौसम फीकैं जाण कै बाउंसर हर बाल।
खुल्लै माथै कृषक है कय्यां बचै कपाल॥
मौसम शाश्वत ‘विनर’ है पाछै रनर किसान।
पण मज़बूरी खेलणो, यो ही बण्यो विधान॥
फील्डिंग कर के गांव का दूखण लाग्या पांव।
मौसम चंपत हो गयो ले कै अपणो दाँव॥