कीं कोनी बिसराईज्यो

ओज्यूं तांई म्हनै सगळी बातां री ओळ्यूं है

हूं आज पाछौ गाजर रो सीरो बणायो हूँ

पण तू कोनीं है

सगलै घर मांय सीरै री सौरम फेल री है

फेल री है म्हारै हिवड़ै थारी ओळ्यूं

सीरै री सौरम पाता थारो दौड़'र

कमरै स्यूं रसोई मांय आणौ अर केवणो—

मां!

गाजर रौ सीरो बणाओ हो कांई

म्हारो मून मुळकणौ

अर थारो बठै चौका मांय

खुश हुय'र घूमर घालणौ

कीं कोनी भूली हूं

ओज्यूं तांई म्हनै सगळी बातां री ओळ्यूं है!

ओळ्यूं है मनै बीं बात री भी

जद सगळां स्यूं लुका'र

म्हैं तनै अचंभौ देवण खातर

बीं रात गाजर रौ सीरो बणायो हो

अर तू आधी रात रा

बीं सीरै चट कर ग्यौ हो

अचंभो मै तनै देवणो चावती ही

पण चौंका तो तू म्हनै दियो

दिनगै सिरावण री टेबल उपरां

बो खाली कटोरो दिखा'र...

कीं कोनी बिसराईज्यो है

ओज्यूं तांई म्हनै सगळी बातां री ओळ्यूं है!

ओल्यूँ है मनै बां घड़्यां री

जद एकर थारै सगळा भायला नै

म्है घरै जीमण रौ नूंतो दियो हो

अर गाजर रौ सीरो भी बणायो हो

सीरै नै देख'र सगळा टाबर

नाचण लाग रिया हा खुशी स्यूं

पण तू सगळां री प्लेटां मांय

परसाद जियां एक-एक चिमचियो सीरो घाल्यो हो

जिका नै देख'र थारै भायलां रो मूंडो इंया बणग्यो

जियां कोई बळ्योड़ौ समोसो!

पण तू बात स्यूं हट'र

पूरै बाटकियै आपरै हाथ मांय ले'र

निंचित हुय'र खा रियो हो

अर घर मांय थारै भायलां रो

थां पर रिसण रो हल्लो माच रियो हो...

आज फैरुं गाजर रौ सीरो बणायो हूँ

पण आज तू नीं है

दूध री तरियां म्हारे हिवडै मांय भी कळका रिया है

अर री है बीं स्यूं थारी

ओळ्यूं री मीठी सौंधी सौरम

कांई खूब रंग आयो है सीरै रौ

एकदम खुशी स्यूं लकदक करतै

थारै चेरै री तरियां

पण आज तू कोनी है

भांगड़ा करण रै वास्तै

पण आज तू कोनी है

सीरो सगळो चट करण वास्तै

पण आज तू कोनी है

थारै भायलां स्यूं झगड़ो करण वास्तै

बस है तो सूनै घर मांय

फगत म्हैं ,सीरो अर थारी ओळ्यूं!

स्रोत
  • सिरजक : अनिला राखेचा ,
  • प्रकाशक : कवि रै हाथां चुणियोड़ी
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