वो उमर भर

मौरा माथे

सूरज ढोवतों रह्यो

टाबरां रे खातर

बूढ़ापा में

टाबर कह दियौ

म्हारा टाबर पाळणा है।

स्रोत
  • सिरजक : दिनेश चारण ,
  • प्रकाशक : कवि रै हाथां चुणियोड़ी
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