पीड़ रा
खेत में अपणा ही
जायोड़ा रै हाथां
बोया कुटिल बीजां नै
उगता देख’र
दादी सा करळापै।
रह्या जिगर रा टूक
आंखा रा तारा
वा किण विध
दुत्कार’र उण रो
परित्याग करै।
अपणो मन मसोसती
मन ई मन सोचती
या जांघ उघाड़ूं तो
या लाजां मरै
अर या उघाड़ूं तो
या जांघ लाजां मरै।
लाज रा फेर में
अपणी कूख री
अपणा कुटम-कबीला री
लाज राखण नै
निगोड़ा जायोड़ां री
नित नुवीं करतूतां रा
दादी सा ढापा ढकै।