अेक रूंखड़ौ म्हारा हाथां में समायगौ है

मांवो-मांय रूंख-रस चढ रयौ है म्हारी बावां में

रूंख म्हारा सीना में ऊग्यायौ है

अंतरमुखी,

ऊग रया है म्हारै मांय सूं— भुजावां री गळाई

वौ रूंख थूं है

थूं है वा जळ-लील

वै बैंगणी रंग रा फूल थूं है ज्यां माथै पून लैरावै

थूं है— अेक छोरी अर इत्ती ऊंची

अर देख तौ सरी

दुनिया रै वास्तै फकत अेक नादानी है।

स्रोत
  • पोथी : अपरंच अक्टूबर-दिंसबर 2015 ,
  • सिरजक : ओजरा पाउंड ,
  • संपादक : पारस अरोड़ा ,
  • प्रकाशक : अपरंच प्रकासण
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