माटी, माटी सूं बात करै

माटी, माटी सूं हेत करै

माटी, माटी सूं लड़ै-भिड़ै

माटी री भासा मांय!

तूं बीं बात नै क्यूं अरथावै

थारै ढब सूं!

माटी रा खिलारां मांय

आत्मा री नकेल क्यूं घालै?

स्रोत
  • पोथी : अंतस दीठ ,
  • सिरजक : रचना शेखावत ,
  • प्रकाशक : बोधि प्रकाशन,जयपुर ,
  • संस्करण : प्रथम
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