(अेक)
ऊंचा विचार
सुधारवादी मान्यता
सब
पत्थर री मूरतियां है
म्है पूजां
या कै
राख’र
सजा सकां।
(दोय)
आधी रात
पपइयो
पी पी घणी पींपाड़ मारी
मोर बोलता रैया
मेंढ़क भी टरटराया
नींद में बेखबर सूती ही रैयी
विचारो रिकार्ड कठैई दूर
चीख्यो–
आ जा रे अब मेरा दिल पुकारे!
नींद उघड़गी
उठ बैठी
दूर परदेश गयोड़ा री
सुध आई
विरह री अनुभूति सूं फेर
नींद ना आई।