बरसगांठ म्हे कियां मनावां, अन्तस में आ बात उठै।
किसो काम पैलो करणो अर, किसै काम सूं उमर बढ़ै॥
ईं विचार में उळझ्योड़ो हो, घरवाळी आ बात कही।
न्हाय निपट झट पूजा करलो, गीता पढ़णी पछै सही॥
स्नान सपाड़ा किया तुरत सूं, ज्यूं ही मिंदर कनै मुड़्यो।
फाटक बाजी, जाय संभाळ्यो, मिनख टाबरी लियां खड़्यो॥
बोल्यो बच्ची रो पग टूटो आप अबै उपचार करो।
म्हैं मान्यो भगवान बोलग्या 'म्हारी पूजा अठै करो'॥
घायल ले उपचार कक्ष में, अस्थि-भंग नै तुरत भर्यो।
पाटा पोळी और पलस्तर, दो घंटा मे सब निवड़्यो॥
दवा और इंजक्सन दीना, पूरी पीड़ा दूर करी।
मन हरख्यो पूजा री बेळा, प्रगट हुया नर रूप हरी॥
फीस और खर्चे री खातर, मिनख जेब में हाथ धरै।
मना कर्यो, समझायो उणनै, मत पूजा में विघन करै॥
‘सर्वभूत हितरत’ नित रहणो, गीता रो आदेस।
नव उछाव निष्काम भाव सूं, लाग्यो रह्यो हमेस॥