चंदो

मेड़ी ऊपराकर

उचक'र

ताळ मांय झांक्यो

पण बैरी हा

धोळा धोरा

आय बिचाळै

चानणी-चूंदड़ी

खोस लीनी

ओढ'र पसरग्या।

स्रोत
  • पोथी : मंडाण ,
  • सिरजक : चैन सिंह शेखावत ,
  • संपादक : नीरज दइया ,
  • प्रकाशक : राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी ,
  • संस्करण : Prtham
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