हेली म्हारी!

धरती पर भागी आवै मौत

चेतै में कोनी चातरक आदमी।

हेली म्हारी!

जग सूरतां नैं बेग संभाळ

कुबद मचावै गैलो मानखो

हेली म्हारी!

धरती मिनख री जोवै बाट

विनास चढ़्यो है धरती ऊपरां

हेली म्हारी।

मिनख धरती री सुध-बुध भूल

मौत बुलाई धरती ऊपरां

हेली म्हारी।

मिनख नै धन धरती रो बोध कराय

अकासां उडै मोबी मानखो

हेली म्हारी।

धरती है मिनख री पाळणहार

मिनख कीकर पळैला धरती ऊपरां

हेली म्हारी।

मिनख में धरती रिक्षा रो सोच प्रगटाय

सरस सरजीवण कर दे मानखो!

हेली म्हारी।

धरती पर भागी आवै मौत

चेतै में कोनी चातरक आदमी

मौत बुलाई जणरी भूख।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : बी.एल. माली ‘अशांत’ ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन, पिलानी ,
  • संस्करण : अंक - 19
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