थे बातां करो जो बारणै, मन्नै सुणरी मांय,

थे मन्नै मारणो चावो, थानै लागैली जी हाय,

लागैली जी हाय, हुवोला घणा ही दोरा,

देखूंला बेटा सूं होस्यो, किता'क सोरा,

किता'क सोरा, दोरा को तो, बेरो पड़सी,

श्याम राखजो याद, आंतड़ी अनाफ बळसी।

नोहरा खावो डाक्टरां रा, दर-दर भटको आप,

सोनोग्राफी करा'र मारो, थे राकस हो, कै बाप,

कांई म्हारो दोस, मन्नै थे बतळावो

जण-जण री सुण, बातां करता क्यूं भरमावो,

क्यूं भरमावो, हाय-हीया री कियां फूटी,

श्याम घड़ी बा आप! आस औलाद री टूटी॥

हया-दया मन में नहीं, कर रैया उंदा काम,

करणी रा फळ भोगसी, ज्यांरो निकळ्यो राम,

ज्यांरो निकळ्यो राम, लाज संको नी आवै,

अैसी नोबत आय, घणां मन में पछतावै,

फेरूं पछताया के होवै, जद चिड़िया चुगले खेत

मिनख जमारो, माथै नाखै, धोबा-धोबा रेत।

कन्या भ्रूण मिटाकर थे, के राजी हो जास्यो, पण!

बेटावां कै खातिर, बहुवां कठै सूं ल्यास्यो,

कठै सूं ल्यास्यो, सोन चिड़कली आंगण सोहती,

माऊ बारै मांय, उमर भर रैहसी रोती

रहसी रोती याद कर्‌यां, अन्तस री पीड़ा

बुढ़ापै फोड़ा पडसी, कुण करसी हीड़ा॥

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : राधेश्याम जोशी ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-31
जुड़्योड़ा विसै