रुं-रुं में छूटगी है धूजणी

जाणै दे दी व्है कोई घंघूणी

स्रिस्टि रै समचै

आखै मौसम नै।

डरूं-फरुं हुय रैयौ है मानखौ

ज्यूं मोसीज रैयौ व्है घांटौ

सिंझ्या पड़तां-पड़तां सड़कां सूनी

अर स्हैर मांय सरणाटौ

कांई रासौ है रे बेली।

यूं लखावै; जाणै लागग्यौ व्है

सड़कां माथै कर्फ्यू

अर धूज रैया व्है सगळा

मै’ल, माळिया, झूंपड़पट्टी अर हेल्यां

रात उतरण सूं पैली।

दिन रा

बादळां सूं

लुकमीचणी कर रैयौ है सूरज

चार्ज कोनी हुय रैयी है उणरी बैटरी

अर रात रा तो यूं लागै

आखौ स्हैर बणग्यौ जाणै

भाटा बरफ री फैक्टरी

मार रैयौ है आपरी लै’र में

मिनख, पंछी अर डांगर

इसौ कुण है

राखस, भड़भाखस

महाडांगर?

जिको मौत रो मजमौ लगाय रैयौ है।

भख माथै भख

लेंवतौ जाय रैयो है?

म्हैं जद घुचघुचाय’र पूछियौ

तौ उथळौ दियौ

डरूं-फरूं हुयौड़ी बेली

चुप रै, कोई सुण ले ली।

है

प्राणां रौ खुराकी

डांफर रौ डाकी

आफत रौ परकाळौ

कोजो अर कोढ़ियौ

सियाळौ।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : सुमन बिस्सा ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-28
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