ठंडी पवन म्हारो छुवै बदन
जीवड़ै में लागै अगन…
बीनै कुण समझावै
कठै स्यूं कुण आवै
बीनै कुण समझावै…
बढ़ती-बढ़ती बढ़गी आ बेलड़ी बाबल की
आती-आती आ ही गई रुत या सावण की
बेलड़ी फूलां आई
गळी में चर्चा छाई
मोरियो मन ललचावै-बीनै कुण समझावै।
छोटी होती-होती होगी ओढ़णिया तन की
छणं-छणं के आवण लागी बात म्हारै मन की
मावड़ी नींद उड़ाई
बापू पर करी चढ़ाई
बोली छोरी उफणती आवै, बीनै कुण समझावै।
पड़ती-पड़ती पड़ जासी बात या पुराणी
म्हारै बीना करसी कुण खेत की रूखाळी
म्हानै तो जायां सरसी
कोई नै आया सरसी
बीनै मनड़ो बुलावै-बीनै कुण समझावै।
ठण्डी पवन म्हारौ छुवै बदन
जीवड़ै में लागै अगन
बीनै कुण समझावै।