कितो बेकळ होयो होसी

जद बरस्यो होसी

पै'लो बादळ

हब्बीड़ उपड्यो होसी

आभै में

अर टळकी होसी

अखूट धार

मोकळा जळव्हाळा लियां

जूण नै पसारण सारू

अबोट धरा माथै!

कित्ती बेकळ रे'ई होसी

मुरधरा

जद कठै जाय'र

उपड़ी होसी एक नदी सूं

पै'ली धार

अनै सिरज्यो होसी

पै'लो बिरवो

थार में

धाड़फाड़!

स्रोत
  • पोथी : थार सप्तक 5 ,
  • सिरजक : नरेंद्र व्यास
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