बादळी लुकगी

सूरज री ओट मांय

चाणचक

बाजण लाग गी पून

जेठ रै अकड़ै तावड़ै मांय

छिंया री कठै गेल।

स्रोत
  • सिरजक : राजेश कुमार व्यास ,
  • प्रकाशक : कवि रै हाथां चुणियोड़ी
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