कागा बोलै कांव-कांव,

रोटी खावै गांव-गांव,

पांणी पीवै ठांव-ठांव।

उडता जावै झूम-झूम,

ऊंचाई नै चूम-चूम,

पाछा आवै घूम-घूम।

लाडू जीमै चूर-चूर,

गणता जावै बूर-बूर,

देखै सबनै घूर-घूर।

स्रोत
  • पोथी : मोती-मणिया ,
  • सिरजक : जगदीस चन्द्र सरमा ,
  • संपादक : कृष्ण बिहारी सहल ,
  • प्रकाशक : चिन्मय प्रकाशन
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