हथळेवो जुड़ पड़ी भावरां लाडां हुई पराई ओ।

बिछुड़बा री बेळ्यां आगी बाज उठी शहनाई ओ।

मायड़ आंगण बाज्या ढोल

व्हैग्या हथळेवा रा कौल

गांठ अब जुड़बा वाळी छै, आज पराई पोळ।

चिड़कली उडबा वाळी छै रे बाबुल्या; उडबा वाळी छै॥

हेत फट्यो बादळियां जेड़ो, ग्रहण लग्यो छै चांद जी।

नेण तळायां भर-भर बरसै, जाणै सावण भाद जी।

बाई रो चेतो उड-उड जाय।

कै हिवड़ै समदर उफण्यो आय।

भंवर अब पड़बा वाळी छै, आज पराई पोल।

आज हेत सूं हेत रूठग्यो बदळ गई तस्बीर जी॥

मायड़ बदळी बाबुल बदळ्यो, बदळ गयो छै वीर जी।

बदळ्या आज लाड रा गाड।

कै करदी आज पराई लाड।

पाहुणी होवा वाळी छै, आज पराई पोळ।

चाल चोकड़ी आज भूलगी, सूख्या कोयल बोल जी।

आंगणिया नै गीलो करती, अंतस आंसू घोळ जी।

बाबुल थारो बाग संभाळ।

कै लाडां आज हुई जंजाळ।

सपन अब होबा वाळी छै, आज पराई पोळ।

आज परायै पूत सगां रै, बेड़्यां पटकी मांय ओ।

बाबुल थारो बाग छोड़तां, काळा-पीळा आय ओ।

बिछुड़तां बाबुलिया रौ द्वार।

कै पगल्यां धरतां आगै बार।

टाबरी मुड़-मुड़ न्हाळी छै, आज पराई पोळ।

लाडां री गत लाडां जाणै, आंसू लड़ियां पोय जी।

फूल कंवर रा फारक पगल्या, मण-मण भारी होय जी।

जवांई रा पगल्या बढ़ता जाय।

कै बाईजी रो मनड़ो पाछो आय।

गांठ अब घुळबा वाळी छै, आज पराई पोळ।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : मोहन मण्डेला ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-14
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