बात करै गर बंटबा की तो थूं अतरो बंट जावैला।
बंटतां-बंटतां तो हे बीरा थूं अतरो घट जावैला॥
नुगरा देश नगरियां नुगरी बसै नागरिक नुगरा तो।
खुद की देह उठाबा तक नै खुद कांधा नट जावैला॥
मरम जोड़बा को चोखो है करम तोड़बा को रोको।
दिल की टूटण नी रोकी तो सब टुकड़ा छंट जावैला॥
घर का पूत कंवारा रहग्या पाड़ोसण परणाती नै।
घर में घुस्या लुटेरा गर तो माल-ताल लुट जावैला॥
भस्म कर दियो भाईचारो सेण सगा में आग सलग।
तोल नहीं नर अतरो नीचो हद सूं जद हट जावैला॥
बंधियो लाख टका को बिखर्यो भेळां में भगवान बसै।
सुख बांटो तो बढ़तो “बीरा” दुख बांटो घट जावैला॥
न्यारी-न्यारी राग न गावो न्यारा ढोल ढमाका रुक।
मेळ भंडारो सलामत सारो भेळां में भट गावैला॥