भीतर हाली एक डाळ
जिकी माथै बसन्त रा फूल हा।
सुर्ख अनै सौरम सूं भर्योड़ा।
इयां ई आयो हो कणांई
थारो एकलो कागद
एक दिन डाक सूं।